आंदोलनरत शिक्षकों ने विभागीय भर्ती नियमावली का तर्पण कर उसे गंगा भागीरथी में किया विसर्जित

 

राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखण्ड के नेतृत्व में गत 18 अगस्त से प्रदेश में समस्त राजकीय शिक्षक सदस्य चरणबद्ध आंदोलनरत हैं। सभी शिक्षकों की शत-प्रतिशत पदोन्नति देने व सीमित विभागीय भर्ती परीक्षा नियमावली को निरस्त करने एवं स्थानान्तरण प्रक्रिया बहाल करने के लिए यह आंदोलन चल रहा है। सभी राजकीय शिक्षक अपने कार्यरत विद्यालयों में शिक्षण कार्य करते हुए, निरंतर विविध माध्यमों से अपनी मांगो हेतु संघर्षरत हैं। गत 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के दिन भी सभी शिक्षकों द्वारा सरकार के द्वारा’ मनाये जाने वाले पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का भी पूर्ण विरोध किया। शिक्षक संघ का आरोप है कि 25 से 30 वर्षों तक एक ही पद पर रखते हुए शिक्षक सेवानिवृत हो रहा है। जिससे छात्रों को भी पर्याप्त शिक्षक नहीं मिल पा रहें हैं। जनपद उत्तरकाशी में ही वर्तमान’ में 96 पद प्रधानाचार्य,
प्रधानाध्यापक विहीन हैं। जिन पर संगठन विगत कई वर्षों से पदोन्नति की मांग कर रहा है। लेकिन विभाग सदैव वरिष्ठता निर्धारण में विसंगति की बात कोर्ट में चलरहे प्रकरण का हवाला देकर, निरंतर ही शिक्षकों व छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार प्रदर्शित करता रहा है।
अध्यापन संवर्ग के सर्वोच्च पदों पर सीमित विभागीय भर्ती परीक्षा नियमावली को बिना संगठन को विश्वास में लिए ही सीधे कैबिनेट में स्वीकृति हेतु प्रस्तुत कर दिया गया। गत सत्र में 16 सितम्बरवको शिक्षा विभाग ने पत्र निर्गत कर इस नियमावली में आवश्यक बदलाव की स्थिति , संभावना’ बनने पर, आवश्यक रूप से राजकीय शिक्षक संघ को भी प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित करते हुए बदलाव हेतु वार्ता करने पर लिखित आदेश सहित सहमति दी गई थी साथ ही उक्त परीक्षा नियमावली भी स्थगित कर दी गई थी। इसके बावजूद भी सीमित विभागीय भर्ती परीक्षा हेतु, नियमावली को पुनः अस्तित्व में लाने के साथ ही विभाग एवं सरकार, इस पर लेवल 12 के पद पर लिखित परीक्षा आयोजित हो रही है।
जबकि अध्यापन संवर्ग का प्रधानाचार्य पद सर्वोच्च पद है, जिस पर पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, सहायक अध्यापक और प्रवक्ता पदों से क्रमशः 55 एवं 45 प्रतिशत निर्धारित कोटे से हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक पदों की पदोन्नति के उपरांत, प्रधानाचार्य का पद शत-प्रतिशत पदोन्नति का पद है। जो कि पूर्व से ही पदोन्नति’ (शत-प्रतिशत) से ही भरा जाता रहा है।
इसी विभागीय नियमावली के विरोध में यहाँ शिक्षकों ने नियमावली का विसर्जन गंगा भागीरथीं में किया। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अतोल महर, जिला मंत्री बलवंत असवाल,
जिला आय-व्यय -व्यय निरीक्षक पुरुषोत्तम सिंह सैंसाण, संयुक्त मंत्री हिमानी मटूड़ा, बरिष्ठ प्रवक्ता शांति प्रसाद नौटियाल, ललित मोहन भट्ट, सुशील चन्द्र थपलियाल,, मनोज पाल परंमार, महेश उनियाल, वेद प्रकाशभट्ट, डॉ.शंभू प्रसाद नौटियाल, डॉ. प्रदीप कोठारी, डॉ. मुरली मनोहर भट्ट, अरविन्द‌ भट्ट , वीरेंद्र नौटियाल, अमेंद्र पाल परमार, राजेश नौटियाल, दिनेश बर्तवाल कनकपाल परमार, दिनेश मिश्रा सुनीता नौटियाल, मंजू नौटियाल, सुरेश बर्तवाल, डॉ.मुकेश नौटियाल, डॉ. भीम सिंह सिह रावत, गुलाब पडियार, धर्मेन्द्र पंवार, मंगल सिंह पंवार, दीपक सेमवाल, सुमेरा प्रजापति, नरेन्द्र कण्डारी, संदीप पंवार, मुक्ता गौड़, खुशपाल सिंह भण्डारी, अवधेश नौटियाल, बच्चन सिंह राणा, जय नारायण नौटियाल इत्यादि लोग शामिल रहे।

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