राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में 13 सितम्बर को जिला मुख्यालय देहरादून, बाह्य न्यायालय ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला एवं मसूरी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल मामले, पारिवारिक मामले, चेक बाउंस से सम्बंधित मामले व अन्य शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामले लगाये गये थे। इस लोक अदालत में फौजदारी के शमनीय प्रकृति के 195 मामले,बैंक सम्बंधी 1055 मामले, धन वसूली संबंधी 19 मामले, मोटर-दुर्घटना क्लेम ट्राईबुनल के 76 मामले, पारिवारिक विवाद सम्बंधी 128 मामले, मीटर वाहन द्वारा अपराधो के 12902 मामले एवं अन्य सिविल प्रकृति के 70 मामलो सहित कुल 11374 मामलों का निस्तारण किया गया तथा 180,422,049/- रू० की धनराशि पर समझौता हुआ। साथ ही बाह्य न्यायालय, विकासनगर के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 1,900 मामलों का आपसी राजीनामे के आधार पर निस्तारण किया गया जिसमे कुल 22,075,346 /- रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ तथा बाह्य न्यायालय ऋषिकेश के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत ने कुल 912 मामलों का निस्तारण कर कुल 43,637,502/- रूपये का राजस्व प्राप्त किया गया। बाह्य न्यायालय डोईवाला द्वारा 225 मामलों का निस्तारण कर कुल 98,72,507/- रूपये का राजस्व प्राप्त किया गया तथा बाह्य न्यायालय मसूरी द्वारा 34 मामलों का निस्तारण कर कुल 40,20,763/- रुपये का राजस्व प्राप्त किया गया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के मामले भी निस्तारित किये गये। उक्त लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के 6901 मामलों का निस्तारण किया गया तथा 36,059,775/- की धनराशि के सम्बंध में समझौते किये गये।
सचिव/ वरिष्ठ सिविल जज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देहरादून श्रीमती सीमा डुँगराकोटी ने कहा कि जिला जज प्रेम सिंह खिमाल के मार्गदर्शन और सतत प्रेरणा से अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यों को गति मिली।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती डुंगराकोटी
का कहना था कि राष्ट्रीय लोक अदालतों के माध्यम ही न्यायालय की गरिमा बनी रहती है तथा सुलह-समझौत की भावना को प्रोत्साहित किया जाता है और समाज में भाईचारे और शाति का वातावरण बनता है। लोक अदालत सरल व त्वरित न्याय प्राप्त करने का एक प्रभाधी माध्यम है, ऐसे आदेश अंतिम होते हैं तथा पक्षकारों को उनके द्वारा दिया गया न्यायशुल्क भी वापस कर दिया जाता है।