संविधान अधिकारों का आधार, कर्तव्यों का मार्गदर्शन : डीएम प्रशांत

 

बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर डीएम प्रशांत आर्य ने विकास भवन परिसर पहुंचकर संविधान दिवस शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर डीएम ने विकास भवन के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना की सामूहिक शपथ दिलाई। यह आयोजन भारत के संविधान को अंगीकार करने की वर्षगांठ मनाने और सरकारी मशीनरी में संवैधानिक मूल्यों तथा सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान डीएम ने स्वयं प्रस्तावना के एक-एक वाक्य का वाचन किया और उपस्थित सभी कर्मचारियों को ‘हम भारत के लोग…’ के संकल्प को दोहराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ज़ोर दिया कि प्रत्येक लोक सेवक का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व है कि वह न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों को अपने दैनिक कार्यों और जनता के साथ व्यवहार में उतारे। डीएम ने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी पुस्तक नहीं, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित करने का हमारा मार्गदर्शक दर्शन है, और इसके सिद्धांतों का पालन करके ही हम सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के असाधारण योगदान को याद किया और उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे जाति, धर्म और लिंग के भेदभाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से जनता की सेवा करें, ताकि संविधान में निहित प्रत्येक नागरिक की प्रतिष्ठा सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जयभारत सिंह ने सभी को संविधान दिवस की बधाई दी और संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में शामिल करने और अधिकारों का पालन करने का आह्वान किया।

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