धामी सरकार ने आगामी नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्रावधान अध्यादेश-2024 लाकर उत्तराखंड की 582 मलिन बस्तियों के तकरीबन 12 लाख से अधिक निवासियों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश में इसी माह नगर निकाय चुनाव होने की संभावना के बीच धामी सरकार द्वारा लाए गए इस अध्यादेश को राजनीतिक हल्को में तुरुप के पत्ते के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि इस अध्यादेश के माध्यम से सीएम धामी ने मलिन बस्तियों के एक बड़े वोट बैंक को साधने की भी कोशिश की है।
गौरतलब है कि नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्रावधान अध्यादेश-2024 को राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश की मलिन बस्तियों के उजड़ने का खतरा अगले 3 वर्ष के लिए टल गया है।
बता दें कि हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद उत्तराखंड में नगर निकायों की सीमा के अंतर्गत बसी मलिन बस्तियां अतिक्रमण हटाओ अभियान की जद में आ गईं थीं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार मलिन बस्तियों को उजाड़ने से बचने के लिए वर्ष 2018 में पहला अध्यादेश लाई थी, जिससे बस्तीवासियों को तीन साल की राहत मिल गई थी। तीन साल की अवधि समाप्त होने के बाद वर्ष 2021 में सरकार फिर अध्यादेश लाई, जिसकी अवधि इस साल अक्तूबर में खत्म हो गई थी । अब सरकार तीसरी बार अध्यादेश लाई है, जिसकी अवधि 2027 तक होगी। मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के राज्यपाल राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अध्यादेश पर अपनी मंजूरी दे दी है। अध्यादेश पर राज्यपाल की स्वीकृति के साथ ही उत्तराखंड की 582 मालिन बस्तियों के 12 लाख से अधिक लोगों को बड़ी राहत मिल गई है तथा अगले तीन साल तक बस्तियों से उजड़ने का खतरा टल गया है।