महर्षि महेश योगी की पावन तपस्थली ज्ञानसू स्थित महर्षि ज्ञान मंदिर में नर्मदेश्वर शिवलिंग एवं शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा का दिव्य समारोह बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के मध्य श्रद्धा एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे साधकों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में सहभागिता कर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
महर्षि महेश योगी संस्थान एवं स्पिरिचुअल रिजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मां नर्मदा तट, जबलपुर (मध्य प्रदेश) से लाए गए पवित्र नर्मदेश्वर शिवलिंग की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। वैदिक विद्वानों द्वारा संपन्न कराए गए हवन, पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान संपूर्ण ज्ञान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि महर्षि महेश योगी का उत्तरकाशी से गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है। अपने गुरु जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के उपरांत महर्षि महेश योगी ने ज्ञानसू स्थित ज्ञान मंदिर में लगभग दो वर्षों तक एकांत साधना एवं तपस्या की थी। इसी तपस्थली से उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त कर विश्वभर में भावातीत ध्यान और वैदिक ज्ञान का संदेश प्रसारित किया।
कार्यक्रम के दौरान महर्षि महेश योगी एवं गुरु परंपरा का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण और आध्यात्मिक उन्नयन की कामना की। ज्ञान मंदिर परिसर को आकर्षक पुष्प सज्जा, धार्मिक प्रतीकों एवं रंग-बिरंगी सजावट से विशेष रूप से सजाया गया था।
समारोह के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इसके उपरांत विशाल प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
स्थानीय प्रबंधक महेंद्र खरे ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महर्षि महेश योगी की तपस्थली ज्ञानसू सदैव आध्यात्मिक साधना और वैदिक ज्ञान के प्रसार का केंद्र बनी रहेगी।