उत्तरकाशी, “डिजिटल क्लाइमेट स्मार्ट हिल फार्मिंग” 25 काश्तकारों को प्रशिक्षण के लिये सीएचओ ने किया रवाना

 

कृषि एवं उद्यान क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मुख्य उद्यान अधिकारी रजनीश सिंह ने 25 चयनित काश्तकारों को “डिजिटल क्लाइमेट स्मार्ट हिल फार्मिंग” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उद्यान विभाग के कर्मचारी एवं क्षेत्र के कृषक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 मई से 6 मई तक“डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन (नौणी), हिमाचल प्रदेश” निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तरकाशी द्वारा किया जा रहा है।
मुख्य उद्यान अधिकारी ने बताया कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता, वर्षा का असंतुलन और तापमान में बदलाव के कारण पारंपरिक खेती प्रभावित हो रही है। ऐसे में “डिजिटल क्लाइमेट स्मार्ट हिल फार्मिंग” जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण किसानों को नई तकनीकों, स्मार्ट उपकरणों और डिजिटल समाधान के माध्यम से खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध होगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों, डिजिटल कृषि उपकरणों, मौसम आधारित फसल प्रबंधन, स्मार्ट सिंचाई तकनीकों एवं आधुनिक बागवानी विधियों की जानकारी देना है साथ ही किसानों को यह भी सिखाया जाएगा कि वे मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके मौसम पूर्वानुमान, बाजार मूल्य और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
सीएचओ ने बताया कि कार्यक्रम में शामिल 25 काश्तकारों का चयन विभिन्न विकासखंडों से किया गया है। इन किसानों को प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक दोनों प्रकार की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने क्षेत्र में अन्य किसानों को भी जागरूक कर सकें।

रवाना होने से पहले कई किसानों ने इस पहल के प्रति खुशी व्यक्त की। एक किसान ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से उन्हें नई तकनीकों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में खेती पहले से ही कठिन है, ऐसे में आधुनिक तकनीकों का ज्ञान बहुत जरूरी है।

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