उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में एक अभ्यर्थी द्वारा अपने मूल अभिलेख रजिस्टर्ड डाक से भेजे जाने के बाद उनके न मिलने या विलुप्त होने को लेकर राज्य सूचना आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है। राज्य सूचना आयोग ने सचिव लोक सेवा आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी कर पीड़ित को क्षतिपूर्ति प्रदान करने तक को निर्देशित किया है। बाकायदा सूचना आयोग ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए लोक सेवा आयोग की गंभीर लापरवाही भी करार दिया है।
बता दे कि डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ग्राम भाट गाँव,पट्टी धनारी जिला उत्तरकाशी ने सूचना के अधिकार के तहत लोक सेवा आयोवा से दो बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। पहले बिंदु पर संतोषजनक सूचना न मिलने पर दूसरे बिंदु जिसमे उनके द्वारा 28 मई 2022 को लोक सेवा आयोग को पंजीकृत डाक से भेजे गए प्रमाणित डाक्यूमेंट्स की प्रति मांगी गई जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई न कोई जानकारी दी गई।
इस बीच सूचना आयोग में डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल बनाम उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के प्रकरण की सुनवाई में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में यह मामला उजागर हुआ कि अभ्यर्थी डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल द्वारा आयोग की भेजे गए मूल अभिलेख आयोग के कार्यालय में पंजीकरण के बाद भी उपलब्ध नहीं हैं। जिस पर सूचना आयोग ने कड़ी नाराजगी जताते हुए लोक सेवा आयोग हरिद्वार के सचिव को निर्देशित किया कि अभ्यर्थी के डॉक्युमेंट्स न मिलने की जांच कराएं और इसकी आख्या सूचना आयोग को भेजें।अभ्यर्थी द्वारा आयोग की गलती पर क्षतिपूर्ति 5 हजार की मांग पर सूचना आयोग ने सचिव लोक सेवा आयोग को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा है कि क्यों न अभ्यर्थी को उक्त राशि प्रदान की जाय। फिलहाल आयोग ने उक्त प्रकरण की अगली सुनवाई 19 नवम्बर तय की है।
दरअसल उक्त मामला असिस्टेंट प्रोफेसर चयन 2021 से संबंधित है। आयोग के अनुसार अभ्यर्थी ने विज्ञापन में मांगे गए पीएचडी प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया जिस कारण उन्हें 1 नवम्बर 2023 की अनहर्ता सूची में शामिल कर दिया गया और बाद में 15 फरवरी 2024 की अंतिम रूप से अनर्ह घोषित कर दिया गया।