2041 की आवश्यकता के अनुमान को आधार मान कर गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के सुनियोजित विकास के लिये मास्टर प्लान बनाये जाने की कार्यवाही शुरू

 

गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान बनाए जाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। इन दोनों धामों के मास्टर प्लान में वर्ष 2041 की आवश्यकता के अनुमानों को आधार मान कर अपेक्षित अवस्थापना सुविधाओं के तेजी से विकास के साथ ही सुविधा, सुगमता, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और कूड़ा निस्तारण जैसे अहम पहलुओं को भी केन्द्र में रखे जाने का निश्चय किया गया है। जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में मास्टर प्लान के शुरूआती प्रारूप पर चर्चा में स्पष्ट किया गया है कि धामों के धार्मिक स्वरूप और परंपराओं को कायम रखने के साथ ही इनकी धारण क्षमता को बढाते हुए स्थानीय लोगों के हितों और आजीविका संवर्द्धन में सहायक प्राविधान सुनिश्चित किए जाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

गंगोत्री एवं युमनोत्री धाम में साल दर साल निरंतर तीर्थयात्रियों का आवागमन बढता जा रहा है। इस बार इन दोनों धामों में चरम यात्राकाल में रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्रियों के आगमन के कारण उत्पन्न चुनौतियों व समस्याआेंं के समाधान हेतु धामों की धारण क्षमता में वृद्धि करने के साथ ही यात्री सुविधाओं व अन्य जरूरी अवस्थापना सुविधाओं को बढाए जाने की अपरिहार्य आवश्यकता को रेखांकित किया था। जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री व यमुनोत्री धाम का मास्टर प्लान बनाकर इन धामों व यात्रा पड़ावों का सुनियोजित विकास किए जाने के निर्देश दिए थे।
शासन एवं प्रशासन के द्वारा इस दिशा में तेजी से कार्रवाई करते हुए गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के मास्टर प्लान की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार कर ली गई है। मास्टर प्लान की रूपरेखा पर जिलाधिकारी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में गंगोत्री एवं यमुनोत्री की मंदिर समितियों के पदाधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि दीर्घकालीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के विकास का खाका तय कर संबंधित विभागों व संगठनों को इन धामों में स्तरीय व उपयुक्त अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए मिल-जुलकर काम करने होंगे। उन्होंने कहा कि इन धामों से संबंधित विभागीय योजनाओं को मास्टर प्लान का अभिन्न हिस्सा मान नियोजन व क्रियान्वयन की व्यवस्था की जाय। इसके लिए संबंधित विभाग व संगठन अपनी योजनाओं की जानकारी मास्टर प्लान के कसलेटेंट एवं अन्य पक्षों को भी साझा करना सुनिश्चित करेंगे। ताकि सुनियोजित व समयबद्ध रूप से अवस्थापना सुविधाओं को धरातल पर उतारा जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि यात्रा व्यवस्था में सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन एक प्रमुख अवयव है, लिहाजा मास्टर प्लान में इसके लिए पुलिस विभाग से परामर्श कर अपेक्षित प्रावधान किए जाने आवश्यक हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि दोनों धामों के लिए आने वाले कुछ सालों के भीतर डबल लेन सड़कें बन जाने के बाद यहां पर यात्रियों का दबाव बढना तय है। जिसे देखते हुए तेजी से बुनियादी ढांचे और यात्री सुविधाओं का विस्तार कर इन दोनों धामों व आखिरी पड़ावों की धारण क्षमता बढाया जाना जरूरी हो गया है। जिलाधिकारी ने मास्टर प्लान के कंसलटेंट को वर्ष 2041 में तीर्थयात्रियों की संख्या का अनुमान लगाकर उसके अनुरूप नियोजन किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि मास्टर प्लान में दोनों धामों की दिव्यता और भव्यता को कायम रखने के साथ ही स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसरों को बढाने के लिए भी उपाय किए जाने जरूरी हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि टनल पार्किंग हेतु प्रस्तावित योजनाओं सहित यमुनोत्री रोप-वे, वैकल्पिक पैदल मार्ग व हेलीपैड सहित खरसाली तथा जानकीचट्टी क्षेत्र के विकास हेतु प्रस्तावित विभिन्न योजनाओं को भी मास्टर प्लान में शामिल किया जाय। जिलाधिकारी ने कहा कि मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने से पूर्व विभिन्न सेक्टरों का समय-समय पर अधिकारियों के द्वारा स्थलीय निरीक्षण करने के साथ ही संबंधित हितधारकों की राय भी ली जाएगी।
बैठक में पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने सुझाव दिया कि मास्टर प्लान में सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन में लिए समुचित प्रबंध किए जाने जरूरी हैं। तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए पर्याप्त क्षमता के फ्री सर्कुलेशन एरिया सहित वेटिंग एरिया की भी व्यवस्था की जाय।
बैठक में कंसलटेंट करन जोशी ने मास्टर प्लान की शुरूआती रूपरेखा का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि दोनों धामों में मंदिर परिसरों के सौंदर्यीकरण, सुरक्षित व सुविधाजनक आवागमन व्यवस्था, घाटों का निर्माण, गेस्ट हाउस निर्माण, यात्री सुविधाओं के विस्तार, पेयजल आपूर्ति व्यवस्था, टायलेट्स व्यवस्था सहित कूड़ा एवं सीवरेज प्रबंधन की समुचित व्यवस्था किए जाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। गंगोत्री धाम में प्रवेश द्वार पर स्वागत प्लाजा एवं सूचना व पंजीकरण केन्द्र का निर्माण, मंदिर तक जाने वाली सड़क को बीस फीट तक चौड़ा कर धाम की आंतरिक सड़कों के लूप स्स्टिम का विकास करने, पुलों के उन्नयन, पुलिस चौकी व व्यावसायिक परिसर का निर्माण, पार्किंग व्यवस्था का सुदृढीकरण के साथ ही सूर्यकुंड व गौरीकुंड के सौंदर्यीकरण व अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की योजना तैयार की जा रही है। यमुनोत्री धाम में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण व सुदृढीकरण के साथ ही घाटों व क्राउड होल्डिंग प्लेटफार्म का निर्माण, चेंज रूम बनाने की योजना मास्टर प्लान में रखी गई है। इसके साथ ही रोपवे, वैकल्पिक पैदल मार्ग एवं हेलीपैड की परियोजना के अलावा खरसाली में रिंग रोड का निर्माण सहित प्रस्तावित टनल पार्किंग व इस क्षेत्र के विकास से जुड़ी अन्य प्रस्तावित योजनाएं भी मास्टर प्लान में सम्मिलित की जाएंगी।
बैठक में यमुनोत्री रोप-वे परियोजना के सीईओ अविरल जैन ने बताया कि रोप वे के लिए वन विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण कर निर्माण के दायरे में आने वाले पेड़ां को चिन्हित कर दिया गया है। दस टावर्स वाले 3.38 किमी लंबाई के यमुनोत्री रोपवे के निर्माण के लिए सामग्री पहॅूंचाने हेतु पहले एक अन्य अस्थाई रोप वे बनाया जाना है। इस परियोजना का निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा।
लोनिवि बड़कोट के अधिशासी अभियंता मनोहर सिंह धर्मसत्तू ने बताया कि यमुनोत्री धाम के लिए खरसाली होते हुए वैकल्पिक पैदल मार्ग के निर्माण हेतु प्रारंभिक सर्वेक्षण कर लिया गया है। 5.46 कि.मी. के इस प्रस्तावित मार्ग पर 600 मीटर में ही नाप भूमि है और बाकी हिस्सा वनक्षेत्र के अंतर्गत पड़ता है। प्रस्तावित मार्ग का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराकर इसकी डीपीआर बनाने की कार्रवाई जल्द संपन्न करा ली जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि भंडेलीगाड का वैकल्पिक पैदल वन मार्ग को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने इसके लिए वन भूमि अंतरण का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जय किशन, अपर जिलाधिकारी रजा अब्बास, उप जिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी, जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी, अधिशासी अभियंता यूपीसीएल मनोज गुसांई, परियोजना अधिकारी उरेडा रॉकी कुमार, उप प्रभागीय वनाधिकारी मयंक गर्ग, सहायक वन संरक्षक कन्हैया लाल, तहसीलदार सुरेश प्रसाद सेमवाल, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल उपस्थित रहे। जबकि प्रभागीय वनाधिकारी अपर यमुना वन प्रभाग रविन्द्र पुंडीर, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर्नल अश्विनी पुंडीर, पूजा गर्ब्याल, चीफ टाउन प्लानर उत्तराखंड शालू थिंड, उप जिलाधिकारी बड़कोट मुकेश रमोला सहित तथा यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरश उनियाल, पवन उनियाल आदि ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया।

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