पिथौरागढ़/ उत्तराखंड बचाओ संघर्ष समिति ने भारत के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पिथौरागढ़ से 130 पर्यावरण बटालियन को अन्यत्र स्थापित किए जाने का विरोध किया।
उन्होंने इस मांग को लेकर चल रहे पूर्व सैनिक संगठन के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो जनपद के प्रत्येक विकासखंड में इसके समर्थन में आंदोलन चलाया जाएगा। समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने रविवार को ईमेल के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री को लिखित पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि चीन तथा नेपाल सीमा से जुड़े इस सीमांत जनपद में दो के स्थान पर दस पर्यावरण बटालियन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिमालय का पर्यावरण सुरक्षित और संरक्षित रहेगा तभी देश और दुनिया को पीने का पानी तथा शुद्ध हवा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हिमालय असुरक्षित हो गया तो दुनिया का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री कई बार उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अपना प्रवास कर चुके हैं और उन्हें हिमालय से विशेष लगाव भी रहा है। उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र के प्रति भारत सरकार का असंवेदनशील होना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भारत सरकार की रक्षा मंत्री को पत्र लिखने की जगह समय लेकर फिजिकल रुप से बातचीत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक संगठन द्वारा हिमालय के पर्यावरण की रक्षा के लिए चलाये जा रहे आंदोलन में सभी संगठनों को एकजुट होकर भारत सरकार तक अपनी आवाज को पहुंचाने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिले के हर गांव घर से भारत सरकार को पोस्टकार्ड भेजने का अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में 130 पर्यावरण बटालियन को जिले से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।