डीएम प्रशान्त आर्य ने वन विभाग,पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को हाल ही में क्षेत्र में भालुओं की बढ़ती आवाजाही और लोगों के घायल होने की घटनाएं उजागर होने को लेकर स्पष्ट कहा कि भालू वन का जीव है,इसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है,लेकिन मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। वन विभाग तत्काल ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए ताकि लोगों में व्याप्त भय को दूर करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। डीएम ने कहा कि किसी भी घटना की जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष टीम तैनात की जाए। टीम के पास ट्रैंक्विलाइजर,सुरक्षा उपकरण व रेस्क्यू वाहन उपलब्ध रहे इसका इंतजाम सुनिश्चित किया जाए। डीएम ने वन विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि जंगल से सटे गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। गांवों में जाकर लोगों को भालू से बचाव के तरीकों की जानकारी दी जाए। स्कूलों में भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाए। जंगल के रास्तों,चरागाहों और पहाड़ी क्षेत्रों में भालू प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड और साइनेज लगाए जाए,ताकि लोग सावधान रह सकें। कैमरा ट्रैप और ड्रोन सर्विलांस तकनीकी सहायता ली जाए। भालुओं की गतिविधियों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर ड्रोन की सहायता ली जाए।
उधर उप प्रभागीय वनाधिकारी रश्मि ध्यानी ने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा जंगल से सटे 27 संवेदनशील गांवों को चिन्हित किया गया है,जहाँ आबादी क्षेत्र में भालू के आने की संभावना अधिक रहती है। चिन्हित सभी गांवों में भालू एवं अन्य जंगली जानवरों से बचाव के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया है। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें स्प्रे किट भी प्रदान की जा रही है। यह स्प्रे किट 10 से 15 फीट की दूरी तक प्रभावी रहती है। यदि भालू या कोई अन्य जंगली जानवर हमला करता है तो उसकी ओर स्प्रे करने से वह कुछ समय के लिए विचलित होकर पीछे हट जाता है,जिससे ग्रामीणों को सुरक्षा हेतु पर्याप्त अवसर मिल जाता है।
