सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी।
जो पितु मातु बचन अनुरागी॥तनय मातु-पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा॥
अर्थात – 🙏हे माता! सुनो, वही पुत्र इस जगत में बहुत बड़भागी है, जो अपने पिता-माता के वचनों का अनुरागी {पालन करने वाला} है। {आज्ञा पालन के द्वारा} माता-पिता को सदा संतुष्ट करने वाला पुत्र हे जननी! सारे संसार में अति दुर्लभ है॥
श्री आदर्श रामलीला समिति {रजि०}, उत्तरकाशी के द्वारा सन् 1952 से अनवरत लीला आयोजित की जाती रही है। इस बार 74वीं पुनरावृत्ति एवं पांचवी बार गढ़वाली बोली में रामलीला आयोजित की जा रही है।
आज की रामलीला में महाराजा दशरथ और कैकई माता के बीच कोप भवन में महाराजा दशरथ के द्वारा देवासुर संग्राम में रानी कैकई को दिए गए दो वचन पर रानी को मनाने के लिए विस्तृत वार्तालाप, श्रीरामचंद्र जी का जगत जननी माँ भगवती सीता जी, लक्ष्मण जी और तीनो माताओं से वनवास जाने की सूचना, अनुमति, तैयारी और राम, लक्ष्मण को अयोध्या नगरी में वापसी को मनाने के लिए वनवास गमन आदि का बहुत ही भावविभोर दृश्यों का मंचन हुआ। जिसमे महाराज दशरथ का अभिनय विजय चौहान, कौशल्या दुर्गा रांगड, सुमित्रा सविता विश्वकर्मा, कैकई उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोक गायिका और लोक कलाकार रेनू डोभाल ने जीवंत अभिनय कर दर्शकों की वाही -वाही लूटी ।