भारत के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा प्रायोजित, वित्त पोषित एवं लघु सिंचाई विभाग उत्तराखंड द्वारा क्रियान्वित एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का जिला सभागार में आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सातवीं लघु सिंचाई, द्वितीय जल निकाय, प्रथम वृहद् व मध्यम सिंचाई एवं प्रथम स्प्रिंग गणना के कुशल क्रियान्वयन हेतु संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना था।
कार्यशाला के दौरान डीएम प्रशांत आर्य ने पूरी तैयारी के साथ उपस्थित नहीं होने पर अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई को कड़ी फटकार लगाई। डीएम ने प्रशिक्षण की प्रायोजक संस्था देव ऋषि एजूकेशनल सोसाइटी द्वारा अधूरी जानकारी देने और अप्रशिक्षित कार्मिकों के साथ उपस्थित होने पर कड़ी फटकार लगाई और चेतावनी देते हुए प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने के निर्देश दिये।
डीएम ने स्पष्ट किया कि डाटा कलेक्शन, विश्लेषण और उसकी शुद्धता में किसी भी प्रकार की गलती नहीं होनी चाहिए ताकि भविष्य की सिंचाई योजनाओं और जल प्रबंधन नीतियों को सटीक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जा सके। डीएम ने कहा कि प्रायोजक संस्था के 50 प्रतिशत कार्यों की रैंडम जांच की जाएगी और कोई भी कार्य गलत पाए जाने पर जवाबदेही भी तय की जाएगी। डीएम ने सख्त लहजे में कहा कि विभाग एवं प्रायोजक संस्था विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सिंचाई संगणनाओ की बारीकियों और तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दें।
इस दौरान सीडीओ जय भारत सिंह , एडीएम मुक्त मिश्र सहित समस्त संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।