उत्तरकाशी नगर पालिका के अब तक के चुनावी इतिहास में भाजपा को सिर्फ एक बार चेयरमैन की कुर्सी हासिल हुई थी वह भी महिला अध्यक्ष के रूप में। 2003 के पालिका चुनाव में महिला नेत्री सुधा गुप्ता भाजपा से अध्यक्ष बनी थी। साल 2003 से 2008 तक के पांच साल के पालिका बोर्ड के कार्यकाल खत्म होने के बाद हुए पिछले तीन बोर्ड के चुनाव में भाजपा का खाता नहीं खुल पाया। साल 2003 से पूर्व की बात करें तो तब इस पालिका में या तो कामरेड का कब्जा रहा या फिर कांग्रेस का।
साल 2008 में हुए निकाय चुनाव में पहली मर्तबा बतौर निर्दलीय भूपेंद्र सिंह चौहान जो कि भूप्पी भाई के नाम से ज्यादा चर्चित हैं ने पालिका अध्यक्ष की सीट पर जीत हासिल की जबकि प्रदेश में तब भाजपा की सत्ता थी। फिर आया 2013 में पालिका का चुनाव। सीट सामान्य घोषित हुई तो दूसरी बार भूपेंद्र चौहान के चुनाव जीतने की हवा जनता के बीच चलने लगी थी। लेकिन नतीजा वही सामने आया जैसा इस बार के चुनाव में सीट घोषित होने को लेकर हुआ यानि पहले महिला और उसके चंद घंटे में सीट सामान्य ओबीसी घोषित हो गई। 2013 में जब सीट पहले सामान्य घोषित हुई तो उसके तत्काल बाद सीट महिला सामान्य घोषित कर दी गई। इस दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता काबिज थी। गौरतलब है कि जब सीट महिला घोषित हुई तो भूपेंद्र चौहान की दावेदारी खत्म हो गई। ऐसे में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार जयेन्द्री राणा जो कि अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थी को अपना पूर्ण समर्थन देकर उसे चुनाव जितवा दिया। कांग्रेस और भाजपा फिर पीछे रह गई। कुल मिलाकर टिकट न मिलने पर भी कांग्रेस व भाजपा के लिये चुनौती साबित हुए। 2018 में हुए पालिका चुनाव में भले ही कांग्रेस से रमेश सेमवाल अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुए मगर कांग्रेस के रमेश सेमवाल और निर्दलीय भूपेंद्र चौहान के बीच कांटे का मुकाबला हुआ। बहुत कम अंतर से हार-जीत का फैसला रहा। यहां तब भाजपा तीसरे नंबर पर रही।
इस बीच 2024 के निकाय चुनाव की सरगर्मी व चुनावी प्रचार अभियान तेज हो गया है।
पहले भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन टिकट नहीं मिला तो बतौर फिर निर्दलीय चुनाव मैदान में भूपेंद्र चौहान उतरे हैं। भाजपा ने किशोर भट्ट को,कांग्रेस ने दिनेश गौड़ को चुनाव मैदान में उतारा है। मुकाबला किस करवट बैठेगा इसका फैसला अंततः जनता/मतदाता ने करना है।