अंकिता भंडारी हत्याकांड की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच और मामले में संलिप्त ‘वीआईपी’ के नाम के खुलासे की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा आहूत ‘उत्तराखंड बंद’ का रविवार को मिला-जुला असर देखने को मिला। कहीं दुकानें पूरी तरह बंद रहीं, तो कहीं व्यापारिक संगठनों ने बंद के आह्वान का विरोध करते हुए प्रतिष्ठान खुले रखे। कुमांऊ में बंद का कोई खास असर नहीं दिखा। हल्द्वानी में बंद समर्थकों ने बाजार में घूमकर व्यापारियों से दुकानें बंद रखने की अपील की। इस दौरान कई स्थानों पर दुकानों बंद रही जबकि कई व्यापारियों ने दुकानें खुली रखी। बंद का यहां मिला जुला असर दिखा। श्रीनगर गढ़वाल में बंद का व्यापक असर दिखाई दिया।
उधर ऋषिकेश में उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने बंद का विरोध किया। महामंत्री प्रतीक कालिया ने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने परिजनों की सीबीआई जांच की मांग स्वीकार कर ली है, तो बंद का कोई औचित्य नहीं है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस बंद को राज्य की अस्मिता से जोड़ते हुए जनता से समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक वीआईपी का नाम उजागर नहीं हो जाता। वहीं, महिला मंच की संयोजक कमला पंत और मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के मोहित डिमरी ने स्पष्ट किया कि उन्हें केवल सीबीआई जांच नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली जांच चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
