उत्तरकाशी, इन दिनों पहाड़ों में कई जगह पौराणिक मेलों का आयोजन हो रहा है। मिशन 2027 करीब है। मेले की अपार भीड़ में राजनीतिक जमीन तलाशने से लेकर चेहरा सामने लाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। देवताओं का आशीर्वाद लेकर इलाके की सुख समृद्धि की कामना का संदेश देकर यह मौजूदगी इस वक़्त तो निसंदेह मिशन 2027 की ओर कहीं अधिक इशारा कर रही है।
इन्ही मेलों में मिशन 2027 को लेकर नेता बंटने लगे हैं। क्या सत्ता क्या विपक्ष संभावित दावेदारों में पार्टी एक, लेकिन पार्टी जन दावेदारों के समर्थन में अलग-अलग हो लिए हैं। अलबत्ता एक दूसरे के समर्थन में पार्टीजन इसे पचा भी नहीं पा रहे हैं। पार्टी जनों का झुकाव उस ओर ज्यादा नजर आ रहा है जहाँ दावेदार के जनाधार से लेकर मैदान में उसकी उम्मीद कहीं उन्हें अधिक नजर आ रही हो। भले ही सार्वजनिक तौर पर यह बात कुछ इस तरह से कही जाती है कि पार्टी जिसे चुनेगी सब उसी पर समर्थन व भरोसा करेंगे।
बहरहाल पहाड़ के मेले मिशन 2027 की तैयारी में लगे नेताओं के लिए एक तरह से किफायतमंद ही साबित हो रहे हैं।
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