एक ये रहे निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य जिन्होंने खड़ंजा संस्कृति से हटकर सामुदायिक पुस्तकालयों की स्थापना की

 

सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के अति सीमांत मुनस्यारी स्थित
नाचनी में आज तीसरा सामुदायिक पुस्तकालय खुल गया। इससे अब दिल्ली, देहरादून की सुविधा मिलेगी लोकल में। पुस्तकालय में कम्पटीशन की समस्त पुस्तके उपलब्ध है। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली, देहरादून में उपलब्ध सुविधा अब सीमांत के विद्यार्थियों को प्रदान की जाएगी।
ज्ञात रहे निर्वतमान जिला पंचायत सदस्य जगत सिंह मर्तोलिया ने खड्जा संस्कृति से हटकर अपनी जिला पंचायत निधि से 10 सामुदायिक पुस्तकालयों की स्थापना के लिए 49 लाख रुपए स्वीकृत किए थे। इसी क्रम में नाचनी सामुदायिक पुस्तकालय को भी फर्नीचर तथा प्रतियोगिता पुस्तकों के लिए 5 लाख रुपए की राशि दी गई थी।
पूर्व क्षेत्र प्रमुख एडवोकेट कुंदन सिंह बथियाल के प्रयासों से बने बहुउद्देशीय भवन नाचनी में इस पुस्तकालय का संचालन किया जा रहा है। पुस्तकालय का संचालन स्थानीय समुदाय के आर्थिक सहयोग से भविष्य में किया जाएगा। आज पुस्तकालय के उद्घाटन करने के बाद इसे क्षेत्र के विद्यार्थियों को समर्पित कर दिया गया है। पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह पंवार ने एक बालिका को पुस्तकालय का परिचय पत्र देते हुए इसका शुभारंभ किया।
सरस्वती, गणेश, की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन कर पुस्तकालय के कीर्तिमान भविष्य के लिए कामना की गई।
सामुदायिक पुस्तकालय अवधारणा के जनक सोसायटी फॉर एक्सन इन हिमालया के अध्यक्ष जगत सिंह मर्तोलिया ने बताया कि नाचनी में यह तीसरा सामुदायिक पुस्तकालय आज से ओपन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक पुस्तकालय का संचालन स्थानीय समुदाय के द्वारा किया जा रहा है। पुस्तकालय को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। स्थानीय संचालन समिति के प्रमुख कुंदन सिंह बथ्याल ने बताया कि इस पुस्तकालय में देहरादून तथा दिल्ली से भी अधिक अध्ययन के संसाधन है। संचालन में स्थानीय समुदाय अपना आर्थिक सहयोग देकर इस मुहिम को सफल बनाने में मदद कर रहे है। पुस्तकालय प्रभारी के रुप में भावना बिष्ट अपनी भूमिका निभा रही है।
प्रथम दिन पुस्तकालय में 20 पंजीकरण हुए।

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