देहरादून/ दिसंबर 2025 में वायरल हुई कथित कॉल रिकॉर्डिंग के बाद विपक्ष सहित सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच प्रदेश सरकार ने आज अपना पक्ष रखा है। सरकार का पक्ष रखने को कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि अदालत ने स्पष्ट रूप से किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के प्रयास से इनकार किया है।
कैबिनेट मंत्री ने अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक निर्णय में दर्ज है कि जांच में किसी रसूखदार को संरक्षण देने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कथित रिकॉर्डिंग पर टिप्पणी करते हुए बताया कि इसी ऑडियो में एक ओर अंकिता की आत्महत्या का जिक्र है, तो दूसरी ओर हत्या की चर्चा। जबकि अदालत ने इसे हत्या मानकर तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ लोग हत्या की घटना से ही इनकार कर रहे हैं, जो विरोधाभासी है।
उन्होंने सरकार की ओर से खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई वैध प्रमाण उपलब्ध है, तो उसे सामने लाया जाए। सरकार किसी भी स्तर की जांच से पीछे नहीं हटेगी। पुलिस और प्रशासन बार-बार अपील कर रहा है कि आरोप लगाने वाले ठोस सबूत लेकर आएं, ताकि उनकी जांच हो सके। उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी राज्य सरकार लेगी।उधर सीबीआई जांच की मांग पर सुबोध उनियाल ने कहा कि पहले तथ्यों की प्रामाणिकता जांचनी होगी। हाईकोर्ट ने एसआईटी की जांच को उचित ठहराया है और किसी को बचाने का आरोप खारिज किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन वहां भी याचिका खारिज हो गई। फिर भी, यदि कोई पुख्ता प्रमाण सामने आता है, तो सरकार हर प्रकार की जांच के लिए तैयार है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। पूरे प्रदेश की भावनाएं अंकिता के साथ हैं और भाजपा का हर कार्यकर्ता उस बेटी को न्याय दिलाना चाहता है, लेकिन इसको राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
