उत्तरकाशी, आत्म निर्भर उत्तराखंड के संकल्प को कर रहे हैं साकार कृष्ण प्रताप रतूड़ी

 

सीमांत उत्तरकाशी के सीमांत ब्लॉक भटवाड़ी के ग्राम सौरा निवासी कृष्ण प्रताप रतूड़ी आज ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक बागवानी और कृषि नवाचार को अपनाया है। कृष्ण प्रताप रतूड़ी ने अपने गांव में लगभग 100 माल्टा के पौधों का बाग विकसित किया है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मशरूम उत्पादन और पॉलीहाउस तकनीक को भी अपनाया है। पॉलीहाउस में मटर, टमाटर सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर वे प्रतिवर्ष तीन लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं। उनका लक्ष्य आने वाले समय में अपने कार्य का विस्तार कर वार्षिक आय को 10 लाख रुपये तक पहुंचाना है, जिस दिशा में वे लगातार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि माल्टा के पौधे उन्हें उद्यान विभाग से निःशुल्क प्राप्त हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार की योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण युवा किस प्रकार स्वरोजगार की नई राह बना सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा बागवानी, उद्यान और कृषि आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास आज जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। कृष्ण प्रताप रतूड़ी जैसे बागवान राज्य के “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” के संकल्प को साकार कर रहे हैं।

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