उत्तरकाशी के प्रसिद्ध पौराणिक मणिकर्णिका घाट पर इन दिनों माँ गंगा की भव्य आरती श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति का अद्भुत केंद्र बनती जा रही है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री गंगा आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक शांति और दिव्यता का अनुभव कर रहे हैं। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अब घाट पर मूलभूत सुविधाओं और पर्याप्त स्थान की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पवित्रा लीला बाल वाटिका सामाजिक संस्था के अजय प्रकाश बड़ोला ने कहा कि इस पौराणिक घाट का पौराणिक महत्व है। हमारे शास्त्रों में बताया गया है यहां जप-तप- दान स्नान का विशेष महत्व है। सरकार को यहां पर सौंदर्यीकरण कराना चाहिए तथा यात्रियों के लिए बैठने, प्रकाश, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि गंगा आरती से स्थानीय व्यापारियों और बाजार को भी लाभ मिल रहा है।
यह घाट धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित यह स्थल देव डोलियों का स्नान घाट भी है तथा यहाँ मुंडन, दान, स्नान, जप और हवन का विशेष महत्व बताया गया है।
गंगा मंदिर के मुख्य पुजारी श्री इंदु शेखर नौटियाल ने बताया कि सैकड़ों वर्षों से गंगा मंदिर समिति द्वारा इस घाट पर भव्य गंगा आरती की परंपरा निभाई जा रही है, लेकिन अभी तक इस ऐतिहासिक घाट की ओर सरकार का पर्याप्त ध्यान नहीं गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीर्थ यात्रियों को इस पवित्र स्थल पर दिव्य वातावरण मिले और इस प्राचीन परंपरा का गौरव बना रहे, इसके लिए घाट का संरक्षण और विकास जरूरी है।